हिल गया अरब क्या होगा अंजाम?
सबसे पहले ट्यूनिशिया में तानाशाही व्यवस्था के खिलाफ जैन सैलाब उमड़ा। उसके बाद मिश्र, लीबिया और अब यमन में लोग सड़कों पर उतर आयें हैं इससे अरब जगत पूरी तरह हिल उठा है। जानकारों ने इन्हें 1977 के ब्रेड सब्सिडी विरोधी अरब इतिहास के सबसे बड़े प्रदर्शन से जोडऩे लगे है। ट्यूनिशिया में जन दबाव के आगे राष्ट्रपति जैनुल आव्दीन बेन अली को देश छोडक़र भागना पड़ा। आब्दीन 1987 से ही ट्यूनिशिया की सत्ता पर काबिज रहे हैं। ट्यूनिशिया में आन्दोलन एक युवा फल व्यापारी मोहम्मद बुवाजिजी द्वारा सरे चौराहे पर आत्महत्या करने के बाद शुरू हुई। इस फल व्यापारी ने पुलिस अत्याचार से तंग आकर आत्महत्या जैसा कदम उठाया था। उसके बाद देश में सरकार खिलाफ प्रदर्शन शुरू हो गए। जिन्होंने बाद में दंगों की शक्ल अख्तियार कर ली। और इसका अंजाम यह हुआ कि वहां 23 साल से सत्ता पर जमे रहने वाले राष्ट्रपति बेन अली को देश छोडक़र भागना पड़ा। ट्यूनिशिया के बाद मिश्र में भी हुस्नी मुबारक सरकार के खिलाफ प्रदर्शन शुरू हुआ। हुस्नी मुबारक मिश्र पर 1981 से शासन कर रहे है। उन पर हमेशा ही अपने विरोधियों के साथ सख्ती से निपटने के...