बड़े काम का है इश्क
बड़े काम का है इश्क इश्क। एक सुकून जो मन पर टपकता है। जलते हुए मन पर पानी सा। मन की यह खोज हमें पता नहीं होती और अचानक जब ये खत्म होती है, तो आप महसूस कर रहे होते हैं कुछ भाप बनकर उड़ रहा है। एक गम, जिसे आप बुझता हुआ महसूस करते हैं। मन पर तेजी से एक राहत झर रही होती है। अंदर एक चुप, एक खामोशी खत्म होती है। मन में एक सन्नाटा टूटता है। एक ठंडी हवा सा झोंका गम की पिघलन से आपको छुड़ाता है। आपके इर्द-गिर्द एक सुकूनी घेरा बनता है। अब गमों को बार-बार खाली हाथ लौटना पड़ता है। पलकें ढलती हैं। आंखों में हसीन सपने तैरने लगते हैं। होठों पर तन्हा उम्मीदें मुस्कुरा उठती हैं। मन ठहाकों से खनकता है, लेकिन बिना शोर के। एक ऐसा एहसास जिसे आप इश्क या कुछ भी कह लें। अंदर होती है क्रांति आपके अन्दर बहुत कुछ टूटना-फूटना शुरू होता है। अंदर एक शांत क्रांति होती है, जिसमें आप फिर से बनते हैं, आपका फिर से निर्माण होता है। आप फिर से तराशे जाते हैं। आपके अंदर का इंसान खूबसूरत आकार लेने लगता है। हां, गम, गुस्सा और आंसू प्यार के स्थाई भाव हैं। यहा...