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राजनीति का भक्ति और झाड़-फूक काल।

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राजनीति का भक्ति और झाड़-फूक काल। ‌आप प्रवचन से ईश्वर का अनुभव करने की कोशिश किए होंगे या अकेले में बैठकर ईश्वर का ध्यान लगाए होंगे। आप आंखें बंद करते हैं और बिना किसी आकार वाले या फिर किसी काल्पनिक आकार वाले ईश्वर की कल्पना करते हैं। आप यहां तक कल्पना करते हैं कि वह बिल्कुल आपकी तरह सजीव है और उसमें असीम शक्ति , असीम सोच , सर्वज्ञ , सर्व शक्तिमान है। ये सब आप काल्पनिक तौर पर करते हैं और इसी पर पूरा यकीन कर उस काल्पनिक सर्वसत्ता से विनती करते हैं , याचना करते हैं , उसकी वंदना करते हैं। उससे बहुत कुछ मांगते हैं। गलतियों पर उससे माफी भी मांगते हैं। अपनी नाकामियों पर उससे काल्पनिक शक्ति प्राप्त करते हैं और काल्पनिक तौर पर आप पहले से अधिक उर्जा महसूस करते हैं।     अभी राजनीति का हाल भी कुछ ऐसा ही है। भक्ति में जैसा कुछ होता हुआ लगता है वैसे अभी राजनीति में कुछ होते हुए लग रहा है। कुछ बताया जा रहा है , लेकिन करके दिखाया नहीं जा रहा? अगर दिखाया भी जा रहा है तो तंत्र-मंत्र की तरह। मतलब कुछ कवायद करते दिखाया जा रहा है और बताया जा रहा है कि इसी से आपका कुछ होग...